पार्वती घाटी जाने का प्लान अचानक ही बन गया।यात्रा से 1 हफ्ते पहले मैंने तय कर किया था कि अब बहुत हो गया हर बार प्लान कैंसल करना।
इस बार तो कहीं ना कहीं घूमने निकल ही जाना है।क्योंकि अगले वीकेंड के बाद वाला वीकेंड दीपावली थी और उस दौरान घरवाले कहीं घूमने जाने नहीं देते इसलिए फैसला कर लिया था कि इसी वीकेंड निकालना है।
क्योंकि दो ही दिन थे इसलिए फैसला हुआ कि ऐसी जगह निकल लूंगा जो दो दिन में चैन से, बिना जल्दबाजी घूमी जा सके। लैंसडाउन का तय किया और मसूरी एक्सप्रेस में कोटद्वार के लिए आरक्षण भी करवा दिया।
उसी हफ्ते ऑफिस में पीयूष से पता चला कि सोमवार को तो हरियाणा में चुनाव है तो हो सकता है ऑफिस बंद हो।
बुधवार तक पक्का हो गया कि हां ऑफिस बंद रहेगा। उसी समय आरक्षण कैंसल कराया।क्युकी अब तीन दिन का वीकेंड था इसलिए अब कहीं दूर निकलना होगा ।
बृहस्पतिवार को रेडबस खोली और कुल्लू का टिकट एचआरटीसी की आर्डिनरी बस में बुक कर दिया।
शुक्रवार को अपना बैग ऑफिस लेकर गया और शाम को मेट्रो से डायरेक्ट कश्मीरी गेट बस अड्डे पहुंच गया।
बस साढे सात बजे की थी और में सात बजे ही वहां था इसलिए कुछ इंतजार करना पड़ा और जब बस आगे लगी तो सबसे पहले चढ़ने वाला में ही था।
मजनू का टीला से आगे निकलते ही ढेरों वोल्वो स्लीपर बसें मिलती है जो प्राइवेट ऑपरेटर चलाते हैं।उनमें मज़े से कम्बल ओढ़कर सोते लोगों को देख रहा था। 12 बजे के आसपास करनाल के आगे कही ढाबे पर खाना खाया और फिर नींद के साथ आंख मिचौली चलती रही। 4 बजे बस आनदपुर साहिब से आगे चाय पीने के लिए रोकी गई तो में भी उतरा।ठंड थी। अंधेरा था।ये ऐसी जगह थी जहां एक तरफ पहाड़ थे और एक तरफ मैदान।पहाड़ों पर दूर एक दो चमकती बत्तियां दिख रही थी।सुंदर नगर में सुबह 6 बजे ड्राइवर और कंडक्टर बदले गए और फिर मंडी, पण्डोह डैम, ऑट टनल और भुंतर होते हुए कुल्लू पहुंच गए।
कुल्लू में उतरते ही याद आया कैश तो है ही नहीं। बैग में बस पचास रुपए होंगे।
बिजली महादेव की बस का पता किया तो पता चला कि अभी यहां आकर खड़ी होगी और 1 घंटे में चलेगी।
अभी 11 बजने को थे तो में अंदर कुल्लू में एटीएम ढूंढने चक दिया।एक एटीएम में रिपेयर चालू थी और वहां भी लोग इंतेज़ार में थे।आखिर मैकेनिक ने हाथ जोड़ दिए की ये आज बंद रहेगा।दूसरा एटीएम काफी देर तक कुल्लू की गलियों में भटकने के बाद मिला। 2 हजार निकाल लिए।
एक दुकान से चार पैकेट बिस्किट लिए और वापस बस अड्डे पहुंचा।
इस बार तो कहीं ना कहीं घूमने निकल ही जाना है।क्योंकि अगले वीकेंड के बाद वाला वीकेंड दीपावली थी और उस दौरान घरवाले कहीं घूमने जाने नहीं देते इसलिए फैसला कर लिया था कि इसी वीकेंड निकालना है।
क्योंकि दो ही दिन थे इसलिए फैसला हुआ कि ऐसी जगह निकल लूंगा जो दो दिन में चैन से, बिना जल्दबाजी घूमी जा सके। लैंसडाउन का तय किया और मसूरी एक्सप्रेस में कोटद्वार के लिए आरक्षण भी करवा दिया।
उसी हफ्ते ऑफिस में पीयूष से पता चला कि सोमवार को तो हरियाणा में चुनाव है तो हो सकता है ऑफिस बंद हो।
बुधवार तक पक्का हो गया कि हां ऑफिस बंद रहेगा। उसी समय आरक्षण कैंसल कराया।क्युकी अब तीन दिन का वीकेंड था इसलिए अब कहीं दूर निकलना होगा ।
बृहस्पतिवार को रेडबस खोली और कुल्लू का टिकट एचआरटीसी की आर्डिनरी बस में बुक कर दिया।
शुक्रवार को अपना बैग ऑफिस लेकर गया और शाम को मेट्रो से डायरेक्ट कश्मीरी गेट बस अड्डे पहुंच गया।
बस साढे सात बजे की थी और में सात बजे ही वहां था इसलिए कुछ इंतजार करना पड़ा और जब बस आगे लगी तो सबसे पहले चढ़ने वाला में ही था।
मजनू का टीला से आगे निकलते ही ढेरों वोल्वो स्लीपर बसें मिलती है जो प्राइवेट ऑपरेटर चलाते हैं।उनमें मज़े से कम्बल ओढ़कर सोते लोगों को देख रहा था। 12 बजे के आसपास करनाल के आगे कही ढाबे पर खाना खाया और फिर नींद के साथ आंख मिचौली चलती रही। 4 बजे बस आनदपुर साहिब से आगे चाय पीने के लिए रोकी गई तो में भी उतरा।ठंड थी। अंधेरा था।ये ऐसी जगह थी जहां एक तरफ पहाड़ थे और एक तरफ मैदान।पहाड़ों पर दूर एक दो चमकती बत्तियां दिख रही थी।सुंदर नगर में सुबह 6 बजे ड्राइवर और कंडक्टर बदले गए और फिर मंडी, पण्डोह डैम, ऑट टनल और भुंतर होते हुए कुल्लू पहुंच गए।
कुल्लू में उतरते ही याद आया कैश तो है ही नहीं। बैग में बस पचास रुपए होंगे।
बिजली महादेव की बस का पता किया तो पता चला कि अभी यहां आकर खड़ी होगी और 1 घंटे में चलेगी।
अभी 11 बजने को थे तो में अंदर कुल्लू में एटीएम ढूंढने चक दिया।एक एटीएम में रिपेयर चालू थी और वहां भी लोग इंतेज़ार में थे।आखिर मैकेनिक ने हाथ जोड़ दिए की ये आज बंद रहेगा।दूसरा एटीएम काफी देर तक कुल्लू की गलियों में भटकने के बाद मिला। 2 हजार निकाल लिए।
एक दुकान से चार पैकेट बिस्किट लिए और वापस बस अड्डे पहुंचा।
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| एचआरटीसी की बस |
हनोगी माता मंदिर (पण्डोह डैम से आगे)
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| ये है कुल्लू |


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